Vishnu Tiwari Case in Hindi – विष्णु तिवारी के बारे में हिंदी में जानिए

हम आपको Vishnu Tiwari Case in Hindi बता रहे हैं। आपको बता दें Vishnu Tiwari को बीते कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने 20 साल बाद रेप व SC/ST एक्ट के मामले में निर्दाेष घोषित कर दिया और उन्हें बरी कर दिया गया है। इस लेख में विष्णु तिवारी केस को हिंदी में विस्तार से बताएंगे, तो चलिए शुरू करते हैं।

    Vishnu Tiwari Case in Hindi – जानिए संक्षिप्त में

    पूरा नामविष्णु तिवारी
    घर का पताललितपुर, उत्तर प्रदेश
    थानाललितपुर के महरौनी
    मामला और आरोपरेप केस
    धाराआईपीसी की धारा 376, 506 और एससी एसटी की धारा 3(1)(7) और 3(2)(5)
    गिरफ्तार की तिथि16 सितंबर 2000
    गिरफ्तारी के वक्त उम्र23 वर्ष
    सजा का ऐलान2003 में ललितपुर कोर्ट द्वारा (आजीवन कारावास)
    जेलआगरा, सेंट्रल जेल
    इलाहाबाद हाई कोर्ट की वकील जिसने इंसाफ दिलाईश्वेता सिंह राणा
    इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील2017
    विष्णु तिवारी के रिहा होने की तिथि5 मार्च 2021

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    सजा काटते काटते निर्दोष विष्णु तिवारी ने अपनों को खो दिया

    यूपी के ललितपुर जिले के ग्राम सिलावन निवासी विष्णु बीते 20 सालों में अपने माँ-बाप समेत अपने दो बड़े भाइयों को खो चुका है। बीते गुरुवार को विष्णु को जेल से रिहा किया गया और फिर जब वह गांव पहुंचे तो पूरे गांव वालों ने उनसे गले मिलकर खुशी जाहिर की और अच्छे से उनका स्वागत भी किया।

    आत्महत्या करना चाहते थे विष्णु तिवारी

    इधर विष्णु ने घर आकर यह भी बताया कि वो अगर कुछ दिन में रिहा नही होता तो वह आत्महत्या कर लेता। क्योंकि अब वो इस जेल की जिन्दगी से छुटकारा पाना चाहता था और उसके लिए उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया था। अब आप सोच सकते हैं कि उनकी बेबसी किस हद तक बढ़ चुकी थी। यदि ऐसा नहीं होता तो विष्णु तिवारी सजा काटने के बाद भी केस से दोषी बाहर होते।

    विष्णु तिवारी केस इन हिंदी – जानिए पूरी कहानी

    विष्णु ने ये भी बताया कि उसे उस जुर्म की सजा मिली, जो उसने किया ही नही था और उसे उस समय के भ्रष्ट सिस्टम के चलते जेल में 20 साल गुजारना पड़ा और Vishnu Tiwari की कोई सुनवाई भी नहीं हुई। जबकि विष्णु ने यह भी कहा कि वह बालिग नही है, Vishnu Tiwari की उम्र 17 साल है और उसने ऐसा कोई भी बुरा कृत्य नही किया है।

    Vishnu Tiwari की तो बस पशुओं को लेकर पीड़ित पक्ष से थोड़ी बहस हुई थी। थोड़ी सी बहस को लेकर विपक्षी ने थाने में तहरीर दे दी। लेकिन पुलिस जानती थी कि मामला झूठा हैं फिर भी दबाव में आकर पुलिस ने उस पर रेप व एससी-एसटी एक्ट के तहद कार्यवाही करके उसे जेल भेज दिया।

    साल 2003 में जेल में रहते हुए ही Vishnu Tiwari को पता चला कि उसे रेप के मामले में दस साल की सजा मिली है और एससी/एसटी एक्ट के मामले में बीस साल की सजा हुई है। उसके पिता ने Vishnu Tiwari की जमानत के लिए जमीन तक बेच डाली लेकिन उसे जमानत नहीं मिली। साल 2013 में विष्णु के पिता को लकवा मार गया और उनकी मृत्यु हो गयी।

    अगले ही वर्ष, साल 2014 में Vishnu Tiwari की मां की भी मौत हो गयी। इतना ही नही कुछ और वर्ष बीतने के बाद उनके दो बड़े भाई रामकिशोर तिवारी व दिनेश की भी मृत्यु हो गयी और वो किसी के भी अंतिम संस्कार में शामिल ना हो सका।

    विष्णु ने आगे ये भी बताया कि वर्ष 2005 के बाद अगले 12 वर्षों तक उनसे कोई भी मिलने जेल नही आया। जब वर्ष 2017 में उनका छोटा भाई महादेव उनसे मिलने आया तब उसने बताया कि उसके मां-बाप और दो भाइयों समेत उसके परिवार के 4 लोगों की मौत हो गयी है। विष्णु तिवारी की केस तो खत्म हुई और उन्हें निर्दोष का तगमा भी मिल गया।

    वर्ष 2018 में, विष्णु जब जेल में थे उस समय उनसे विधिक सेवा के अन्तर्गत आये वकील ने आगे हाइकोर्ट में उनकी सुनवाई की और उनका केस लड़ा और फिर अंत में हाईकोर्ट ने उसे निर्दाेष करार दिया और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया। Vishnu Tiwari Case in Hindi को आपने विस्तार से समझा है।

    आखिर क्यों विष्णु तिवारी की मदद करनी चाहिए सरकार को

    अपनी जिंदगी के अहम बीस साल तक जेल में बिताकर निर्दाेष साबित हुए विष्णु तिवारी ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है और उनका कहना है कि आज उसके पास कुछ नहीं बचा, ना ही उनके पास रहने के लिए घर और जमीन तो Vishnu Tiwari की पहले ही बिक गयी थी। ऐसे में उन्हें सरकार से काफी उम्मीद है, वो कहते है कि सरकार उन्हें रहने के लिए प्रधानमंत्री आवास दे और उनके रोजगार के लिए भी कुछ ऐसा काम दें जिससे वो अपना जीवन यापन कर सके।

    आपको बता दें कि जिस घर में विष्णु 20 वर्षों पहले रहते थे वो घर अब खण्डहर में तब्दील हो चुका है। गुरुवार को आगरा जेल से रिहा होकर जब विष्णु अपने घर पहुंचे तो अपने घर की खण्डहर जैसी हालत में देखकर बोले कि अब वह कहां रहेगा? क्योकि एक-दो जो थोड़ा ठीक है उसमें उसके भाई वगैरह रहते हैं।

    विष्णु के छोटे भाई महादेव ने बताया कि विष्णु को सजा मिलने के बाद से ही गाँव वालों ने उनका भी बहिष्कार कर दिया था और उनके परिवार से सब दूर-दूर ही रहते थे। यहाँ तक कि उन्हें कोई अपने यहाँ किसी कार्यक्रम में भी नहीं बुलाते थे। दो-तीन साल पूर्व जब लोगों को थोड़ी बहुत सच्चाई के बारे में पता चला तब से ही गांव के लोग उन्हें बुलाने लगे हैं।
    उन्होंने आगे यह भी कहा कि सरकार द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री आवास भी नही मिला, सिर्फ उनके मंझले भाई को उसके घर में एक शौचालय का लाभ मिल पाया हैै। विष्णु तिवारी के केस को मानो सब भूल गए। आखिरकार एक समय आ ही गया जब निर्दोष Vishnu Tiwari को केस से रिहा मिली

    फाइनल वर्ड्स

    विष्णु तिवारी 5 मार्च 2021 को जेल से रिहा हुए। लोगों को उनकी बायोग्राफी जानने में दिलचस्पी है। इस लेख में हमने Vishnu Tiwari Case in Hindi बताया है। यहां आपने विष्णु तिवारी के केस और जीवन से जुड़ी अन्य चीजों के बारे में जाना है। उम्मीद करता हूं कि आपने हमारे लेख को इंजॉय किया होगा।

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